नरीमन पॉइंट
नरीमन पॉइंट! भला ये नाम कहाँ से आया?
हमे इसके बारे मे कुछ पता नहीं था। सिवाय इसके कि वहां एक पुराना बिल बोर्ड लगा रहता था जिस पपर लिखा हुआ था नरीमन पॉइंट!
बस इस तरह इसे ये नाम मिला। वैसे तो नरीमन पॉइंट शहर के बाहर एक रोड साइड प्लेस है जहां हम अक्सर शाम को सड़क किनारे बैठे बतियाते रहते थे। दीपक और मेरा मानना है की वहां शाम को बैठने की शुरुआत हमने की।
इससे पहले वहाँ कोई नहीं आया करता था। शायद हमें देख कर और भी लोग वहाँ आने लगे और इस तरह ये प्लेस क्राउडेड होता चला गया। पता नहीं दुसरे इस जगह को क्या कहते होंगे लेकिन हमारे लिए ये हमारा नरीमन पॉइंट था।
लेकिन धीरे-धीरे ये जगह ढाबो और काम्प्लेक्स के बीच कही गुम होती जा रही है। हालांकि ये रोड साइड आज भी वहां है लेकिन उसके आस-पास जो शांति और सुकून पसरा हुआ करता था वो अब नहीं रहा।
वहां रात तो है लेकिन नयी बसाहट की रोशनी में तारों से भरा आसमान कहीं धुंधला गया। वो काल-पुरुष और सप्त ऋषि का नजारा जिसे देख कर सुखद महसूस किया करते थे वे कहीं ओझल हो गए।
अब और दूर जाना होता होगा। उन्हें जो हमारी तरह इन 'रोड साइडो' पर अपने दिल की कहने-सुनने और दो पल दोस्तों में गुजारने के लिए ऐसी जगह की तलाश में होते हैं।
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