मेरा बदलना...तुम्हारा नहीं

हमारे आसपास की चीजे कितनी जल्दी बदल जाती है। हम ये तक भूल जाते है की वे प्रारम्भ में कैसी रही थी। लेकिन शायद ये चीजे नही है जो बदल जाती है, ये मनुष्य ही है जो हर पल बदलता रहता है, जिसके मायने बदलते रहते है। ...आज से कुछ साल पहले भी पारिजात* इसी तरह आँगन में खड़ा था और आज भी है, लेकिन ये में हूँ जो बदला हूँ, पारिजात नही। वाही पारिजात जिसे मैं बेहद पसंद करता था और जिसे बाँहों में भर लिया करता था...

*मेरे घर के आँगन में खड़ा पेड़ जिस पर छोटे सफ़ेद फूल, केसरिया डंठल के साथ, सिर्फ़ ठण्ड के दिनों में खिलते है.

Comments

Popular posts from this blog

पारिजात

माय फ्रेंड एंड अदर एनिमल्स